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माता-पिता के महात्याग को सदैव याद रखें
एमडीएम मेडिकल कॉलेज में स्वागत समारोह
इन्दौर. मेडिकल कॉलेज में आज 2018 बैच के नव प्रवेशित विद्यार्थियों का पहला दिन था. उनकी मेडिकल शिक्षा की साढ़े पांच साल की यात्रा को सरल, सफल, सार्थक और निर्बाध बनाने के उद्देश्य से स्टूडेंट वेलफेयर कमेटी ने 2015 और 2016 बैच के विद्यार्थियों के सहयोग से अनौपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया. इस समारोह में 2018 के लगभग 145 स्टूडेंट्स और कुछ छात्र-छात्राओं के माता-पिता भी उपस्थित थे. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवागत छात्र-छात्राओं के दिलोदिमाग से सभी तरह के भयों को निकाल कर सीनियर-जूनियर के बीच परस्पर सरोकार, सहयोग और सौहार्द स्थापित करना भी था.
अधिष्ठाता डॉ.शरद थोरा ने उन्हें सम्बोधित करते हुए बताया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज, देश के सबसे पुराने पांच चिकित्सा शिक्षण संस्थानों में से एक है. 1878 में चार स्टूडेंट्स से शुरू यह संस्थान शीघ्र ही 250 स्टूडेंट्स की क्षमता का होने वाला है. पद्मभूषण डॉ.एस.के. मुखर्जी, डॉ.पोहोवाला, डॉ.जंगलवाला, पद्मश्री डॉ.नंदलाल बोरदिया, पद्मश्री डॉ.महाशब्दे, डॉ.ओहरी और डॉ.अकबर अली जैसे चिकित्सकों ने देश विदेश में ख्याति अर्जित कर एमजीएम का नाम रोशन किया है .
उन्होंने गुजारिश की कि खूब मन लगाकर पढ़ाई कर ऐसा स्थान पाएं कि इस संस्थान को आप पर गर्व हो ढ्ढ एक अच्छा चिकित्सक, एक बेहतरीन इंसान और श्रेष्ठ नागरिक बनने के लिए भी डॉ.थोरा ने प्रेरित किया ढ्ढ उन्होंने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई में कोई शार्टकट नहीं होता है . उन्होंने स्टूडेंट्स को यह भी स्मरण कराया कि सदैव याद रहे कि आपकी सफलता के पीछे आपके माता-पिता का त्याग भी है. फिजियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ.अपर्णा जोशी, एनाटामी की अध्यक्ष डॉ.अमीत जुल्का, बायोकेमिस्ट्री की अध्यक्ष डॉ.संगीता पानेरी और बियाण्ड मेडिसिन के डॉ.वाधवानी ने भी अपने संबोधन में अध्ययन आने वाली समस्याओं के निराकरण के उपाय बताएं ढ्ढ
डायरी लिखने की आदत डालें
क्लीनिकल सेन्स, कम्यूनिकेशन स्किल्स, एथिक्स इन मेडिकल प्रोफेशन कमेटी के अध्यक्ष डॉ.अपूर्व पौराणिक ने क्लीनिकल सेन्स विकसित करने के गूढ़ रहस्यों को बताते हुए कहा कि प्रतिदिन डायरी लिखने की आदत डालें और उसके एक हिस्से में क्लीनिकल पोस्टिंग के दौरान देखें गए रोगियों के विषय में भी लिखें, कम से कम दस प्रतिशत रोगी ऐसे होंगे, जिन्हें आप कभी भूल नहीं पाएंगे. जिनके पास लेखन कला है, वे सरल भाषा शैली में क्लीनिकल टेल (रोगी-कथा) लिखने की कला विकसित करें.
सारे अहंकारों का विसर्जन करें
स्टूडेंट वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष और कार्यक्रम के आयोजक डॉ.मनोहर भण्डारी ने कहा कि आप विभिन्न राज्यों, शहरों, गाँवों, और कस्बों से आए हैं, अलग अलग पारिवारिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आएं हैं, आपका अपना एक विशेष ईगो होगा, अहंकार होगा, उनके कारण आपकी अलग से पहचान भी होगी परन्तु आज उन सारे अहंकारों का विसर्जन कर एक ही ईगो, एक ही विशिष्ट पहचान आपमें प्रवेश कर जाना चाहिए कि आज से आप एमजीएम के स्टूडेंट हैं, और आपकी यही पहचान है. एमजीएम की प्रतिष्ठा अब आपकी प्रतिष्ठा है, इसलिए ऐसा कोई काम ना करें, जिससे एमजीएम की प्रतिष्ठा पर कोई दाग लगे. कार्यक्रम का संचालन सोमेश जोशी, प्रांजल गुप्ता, मुस्कान अग्रवाल, सुयश, अखिलेश और प्रिया ने किया.


